रीख 26 जून 2018. अमरीका के विस्कॉन्सिन में रहने वाले एक परिवार के घर एक नन्हा मेहमान आने वाला था.
अस्पताल की वो रात सिर्फ़ मां के लिए ही अलग नहीं थी, पिता के साथ भी कुछ
ऐसा हुआ जो उन्होंने कभी सपने में नहीं सोचा था.
एप्रिल न्यूबॉर्स की
डिलीवरी इतनी सामान्य नहीं थी क्योंकि उनका ब्लड-प्रेशर बहुत हाई था. वो
लंबे समय से प्री-एक्लेंपसिया से पीड़ित थीं. ये बीमारी गर्भवती महिलाओं को
ही होती है. डिलीवरी के दौरान उनकी हालत इतनी ख़राब हो गई कि सीज़ेरियन
डिलीवरी करानी पड़ी.
देर रात एप्रिल ने बेटी को जन्म दिया. बेटी का नाम रोज़ेली रखा. जन्म के वक्त रोज़ेली का वजन 3.6 किलो था.
लेकिन
बेटी के जन्म के बाद ही एप्रिल को दूसरी मेडिकल समस्याएं शुरू हो गई और
आगे के इलाज के लिए उन्हें अस्पताल के दूसरे कमरे में भेज दिया गया. ये सब
कुछ इतना जल्दी हुआ कि वो अपनी नवजात बच्ची को गोद में भी नहीं उठा पाईं.
जब नर्स को बच्चे की मां नहीं मिली तो उसने रोज़ेली को उसके पिता मैक्समिलियन को दिया गया.ता मैक्समिलियन ने बीबीसी को बताया, "एक नर्स अपनी गोद में हमारी
खूबसूरत सी बेटी को लेकर आई. हम नर्सरी की ओर बढ़े. मैं एक जगह बैठ गया और
अपनी शर्ट उतार दी ताकि मैं उसका स्पर्श महसूस कर सकूं."
"नर्स ने कहा कि हमें बच्ची को कुछ देना पड़ेगा और उंगली से ही दूध पिलाना होगा, कम से कम शुरुआत तो करनी ही होगी."
"इसके
बाद नर्स ने मुझसे पूछा कि क्या मैं अपनी छाती पर एक निप्पल लगाकर असल में
ब्रेस्टफ़ीड कराना पसंद करूंगा. मैं इसे ट्राई करने के लिए तैयार हो गया
और कहा हां, क्यों नहीं."र्स ने एक ट्यूब की मदद से एक प्लास्टिक निपल को मेरी छाती से चिपका
दिया. ये ट्यूब फॉर्मूला मिल्क से भरी एक सीरिंज से जुड़ा हुआ था.
"मैंने
कभी भी ये नहीं किया और वाकई कभी ऐसा करने के बारे में सोचा भी नहीं था.
मैं किसी बच्ची को ब्रेस्टफ़ीड कराने वाला पहला शख़्स था."
"मेरी सास ने जब ये देखा तो उन्हें अपनी आंखों पर यक़ीन ही नहीं हुआ."
"कुछ
ही वक़्त में मुझे अपनी बेटी के साथ एक जुड़ाव महसूस होने लगा. मैंने उसे
गोद में उठा रखा था और लगातार कोशिश कर रहा था कि उसे ब्रेस्टफ़ीड करने में
दिक्क़त न हो."
मैक्समिलियन ने अपने फ़ेसबुक अकाउंट और इंस्टाग्राम पर अपने इस अनुभव को शेयर किया है.
उनकी
छाती पर एक टैटू बना हुआ है जिस पर मॉम लिखा हुआ है. पोस्ट शेयर करने के
बाद उन्हें कई कमेंट्स मिले. एक यूज़र ने लिखा कि "मॉम के टैटू के ठीक नीचे
और ये वाकई उसको सही भी साबित कर रहा है."
कुछ लोगों ने उस नर्स की भी तारीफ़ की है जिसने ये विकल्प सुझाया.
लेकिन कुछ लोगों ने ये भी कहा कि उन्हें एक पुरुष को ब्रेस्टफ़ीड कराते हुए देखना, थोड़ा अजीब लगा.
मैक्समिलियन
की पोस्ट 30 हज़ार से ज़्यादा शेयर हुई है और उस पर सैकड़ों प्रतिक्रियाएं
आई हैं. मैक्समिलियन का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ वही किया जो ऐसी
स्थिति में कोई भी पिता करता. रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते एक जून
को सिंगापुर गए थे, जहां उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री ली शियेन लुंग से
मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण पर बात की थी.
नरेंद्र मोदी ने कहा
था, "समस्या का समाधान सीमाओं के भीतर रहकर नहीं मिलते बल्कि गले लगाने से
मिलते हैं. हम सभी के लिए समान स्तर चाहते हैं. भारत खुले और स्थिर
अतंरराष्ट्रीय व्यापार के पक्ष में खड़ा है."
अमरीका ने स्टील और
एल्युमिनियम पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फ़ैसला किया था. ऐसे में भारत ने
इसके जवाब में कुछ उत्पादों के आयात शुल्क बढ़ाने का फ़ैसला किया.
भारत
सरकार की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में इस फ़ैसले को "मौजूदा
परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई" के तहत ज़रूरी बताया गया है.
भारत ने सेब, बादाम, अखरोट, छोले जैसे कृषि उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी
20 से 90 फ़ीसदी तक बढ़ा दी है. पहले बादाम पर प्रति किलो 35 रुपये इंपोर्ट
ड्यूटी थी, जो अब बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो कर दी गई है.
छिले हुए बादाम पर इंपोर्ट ड्यूटी 100 से 120 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई
है. वहीं सेब पर अब 75 फ़ीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी, जो पहले 50 प्रतिशत
थी.
अख़रोट पर लगने वाले ड्यूटी में सबसे ज़्यादा वृद्धि की गई है. इसे 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 120 प्रतिशत कर दिया गया है.
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद अब खाने-पीने की ये चीजें भारत में
महंगी मिलेंगी. सरकार से इस फ़ैसले से ड्राई फ्रूट्स के व्यापारी चिंतित
हैं.
वो मानते हैं कि इस फ़ैसले का सबसे ज़्यादा असर बादाम पर पड़ेगा. भारत
बादाम का सबसे बड़ा आयातक देश है. यहां कुल खपत का 80 फ़ीसदी हिस्सा अमरीका
से आयात किया जाता है.
कंवरजीत बजाज पिछले 59 सालों से बादाम का
व्यापार कर रहे हैं. वो कहते हैं कि पहले इतने बड़े स्तर पर इंपोर्ट ड्यूटी
नहीं बढ़ाई गई थी.
वो कहते हैं, "हर साल 90 हज़ार किलो टन बादाम अमरीका से आयात किया जाता है. अगर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो वो अपना
50 प्रतिशत बाज़ार खो देगा. इसका असर अमरीका के किसानों और उसकी आमदनी पर
पड़ेगा."
"व्यापारी ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और अफ़ग़ानिस्तान से बादाम
मंगवाएंगे. भारत के ग्राहकों को यह 100 रुपये अधिक महंगा मिलेगा और खुदरा
दुकानों में कीमतें और ज़्यादा हो सकती हैं."
लेकिन इंपोर्ट ड्यूटी
बढ़ाए जाने के फ़ैसले को कई विशेषज्ञ अच्छा मानते हैं. दिल्ली के खाद्य
बाज़ार विशेषज्ञ कैथ सुंदरलाल कहते हैं, "अमरीकी सेब देसी सेब से बेहतर
होते हैं. अगर बेहतर गुणवत्ता वाले सेब बाज़ार में नहीं रहेंगे तो देसी
किसान अच्छे सेब उगाने पर जोर नहीं देंगे. इससे विदेशी सेबों से
प्रतियोगिता की भावना कम होगी."
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एल्युमिनियम और स्टील के आयात पर
बढ़ाए गए इंपोर्ट ड्यूटी ने भारतीय बाज़ारों पर असर डाला है. एल्युमिनियम
पर 25% और स्टील पर 10% टैक्स बढ़ाया गया था.
प्रीत पाल सिंह हरियाणा के पास कोडंली में स्टील के बर्तन का व्यापार करते हैं. यह उनकी तीसरी पीढ़ी है जो यह व्यापार कर रही है.
वो बर्तन बनाते हैं और उसे दुनियाभर में भेजते हैं. वो हर साल करोड़ों रुपये के बर्तन अमरीका भेजते हैं.
70
सालों में पहली बार उनके बर्तनों की मांग अमरीका में घटी है. वो कहते हैं,
"हमारी कुल बिक्री का 25 से 30 प्रतिशत अमरीका अकेले ख़रीदता था. यह हमारे
लिए बड़ा बाज़ार है. लेकिन अब मांगों में भारी कमी आई है."
उनको लगता है कि अगर अमरीका और भारत के बीच इसी तरह की व्यापार नीति चलती रही तो उन्हें अपनी फैक्ट्री से लोगों को निकालना पड़ेगा.
भारत ने विश्व व्यापार संगठन में अमरीका के नीतियों के ख़िलाफ़ अपनी
नाराज़गी दर्ज कराई है. लेकिन अभी तक दोनों पक्षों में बातचीत आगे नहीं
बढ़ी है. उम्मीद है कि आगे समाधान निकले.
भारत ने अमरीका के लिए
बातचीत का दरवाज़ा खुला छोड़ा है. उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक
नीतियों के स्तर पर आई इस मुश्किल का समाधान हो.
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