ड्राइविंग सीखने के दौरान का समय याद करते हुए लक्ष्मी बताती हैं कि
ड्राइविंग सीखना उनके लिए आसान नहीं था. शुरू में उनके हाथेली में दर्द होने लग जाता था लेकिन अब वे मास्टर हो गई हैं.
वे बताती हैं, "अब तो कई सवारी केवल मेरे ही रिक्शा में बैठती हैं जिसके लिए उन्हें कई बार इंतजार भी करना पड़ता है. ये सब देखकर कई दूसरे ऑटो वाले नाराज होते रहते हैं लेकिन अब इन सबकी आदत हो गई है."
वे बताती हैं, ''कुछ लोग कहते हैं कि औरतों की ड्राइविंग ख़तरनाक होती है. औरतों को ड्राइविंग नहीं आती. कई बार तो कुछ लोग मुझे नसीहत तक दे देते हैं कि औरतों को रिक्शा चलाना शोभा नहीं देता तुम दूसरे काम करो. ऐसे लोगों को मैं बस एक ही जवाब देती हूँ कि जब औरतें तुम जैसे मर्दों को पैदा कर सकती हैं तो वो दुनिया का कोई भी काम कर सकती हैं.''
फ़िल्म में रितिक रोशन लीड रोल में हैं यानी वो पर्दे पर आनंद कुमार का किरदार निभा रहे हैं.
'सुपर 30' के ट्रेलर आते ही इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि फ़िल्म के अभिनेता रितिक रोशन क्या सही बिहारी लहज़े में बोल पा रहे हैं?
कई लोगों का कहना है कि रितिक रोशन अपने संवादों में बिहारी अंदाज़ वाली हिन्दी को आत्मसात नहीं कर पाए हैं.
लेकिन क्या आनंद कुमार अपने किरदार के रूप में रितिक रोशन से ख़ुश हैं?
इस बारे में आनंद कुमार ने बीबीसी से कहा, ''मैं, बहुत ख़ुश हूं. अभी तो ट्रेलर ही देखा है और लग रहा है कि वो रितिक नहीं बल्कि मैं ही हूं. ट्रेलर में हाशिए के समाज के एक शिक्षक के संघर्ष की झलक साफ़ दिख रही है. ट्रेलर में तो हमारी पीड़ा, संघर्ष और सुपर 30 की यात्रा की एक झलक भर है. पूरी फ़िल्म हमारे जीवन की कई अहम घटनाओं से पर्दा हटाएगी. मैं बहुत ख़ुश हूं कि 12 जुलाई को फ़िल्म रिलीज़ होने जा रही है.''
इस बारे में बीबीसी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर पाठकों से भी पूछा कि उन्हें फ़िल्म का ट्रेलर कैसा लगा और आनंद कुमार के रोल में रितिक रोशन कैसे लगे? इस पर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
गजानन ने लिखा, ''ग़ज़ब का ट्रेलर है. रितिक रोशन सर कमाल की एक्टिंग है.''
@Noorala22536925 ट्विटर हैंडल से लिखा गया- ये काफी प्रेरक फ़िल्म लग रही है. मोउनुद्दीन रहमानी लिखते हैं, ''रितिक रोशन बहुत ही बढ़िया लगे हैं.''
सुमित कृष्णा ने लिखा, ''पंकज त्रिपाठी उर्फ़ कालीन भैया ज्यादा मुफ़ीद रहते आनंद सर की भूमिका के लिए.''
प्रदीप लिखते हैं, ''इस फ़िल्म में राज कुमार राव या पंकज त्रिपाठी जैसे एक्टर्स की ज़रूरत थी, जिन्होंने थियेटर किया है. रितिक ग्लैमरस हैं.'
जयंत कुमार ने लिखा, ''कहानी डायलॉग सब कुछ ठीक है पर रितिक रोशन की ओवर एक्टिंग कुछ ज़्यादा ही दिख रही है.''
राजेश कुमार लिखते हैं, ''रितिक रोशन की एक्टिंग से बिहारी लहज़ा नदारद दिखा. मनोज वाजपेयी या पंकज त्रिपाठी इस रोल के लिए काफी अच्छे रहते.''
सौरभ सिंह ने लिखा, ''रितिक बिहारी लहज़े को पकड़ने में बिलकुल नाकाम रहे हैं. रितिक के हाव-भाव 'कोई मिल गया' के रोहित जैसे लग रहे हैं.''
वे बताती हैं, "अब तो कई सवारी केवल मेरे ही रिक्शा में बैठती हैं जिसके लिए उन्हें कई बार इंतजार भी करना पड़ता है. ये सब देखकर कई दूसरे ऑटो वाले नाराज होते रहते हैं लेकिन अब इन सबकी आदत हो गई है."
वे बताती हैं, ''कुछ लोग कहते हैं कि औरतों की ड्राइविंग ख़तरनाक होती है. औरतों को ड्राइविंग नहीं आती. कई बार तो कुछ लोग मुझे नसीहत तक दे देते हैं कि औरतों को रिक्शा चलाना शोभा नहीं देता तुम दूसरे काम करो. ऐसे लोगों को मैं बस एक ही जवाब देती हूँ कि जब औरतें तुम जैसे मर्दों को पैदा कर सकती हैं तो वो दुनिया का कोई भी काम कर सकती हैं.''
फ़िल्म में रितिक रोशन लीड रोल में हैं यानी वो पर्दे पर आनंद कुमार का किरदार निभा रहे हैं.
'सुपर 30' के ट्रेलर आते ही इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि फ़िल्म के अभिनेता रितिक रोशन क्या सही बिहारी लहज़े में बोल पा रहे हैं?
कई लोगों का कहना है कि रितिक रोशन अपने संवादों में बिहारी अंदाज़ वाली हिन्दी को आत्मसात नहीं कर पाए हैं.
लेकिन क्या आनंद कुमार अपने किरदार के रूप में रितिक रोशन से ख़ुश हैं?
इस बारे में आनंद कुमार ने बीबीसी से कहा, ''मैं, बहुत ख़ुश हूं. अभी तो ट्रेलर ही देखा है और लग रहा है कि वो रितिक नहीं बल्कि मैं ही हूं. ट्रेलर में हाशिए के समाज के एक शिक्षक के संघर्ष की झलक साफ़ दिख रही है. ट्रेलर में तो हमारी पीड़ा, संघर्ष और सुपर 30 की यात्रा की एक झलक भर है. पूरी फ़िल्म हमारे जीवन की कई अहम घटनाओं से पर्दा हटाएगी. मैं बहुत ख़ुश हूं कि 12 जुलाई को फ़िल्म रिलीज़ होने जा रही है.''
इस बारे में बीबीसी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर पाठकों से भी पूछा कि उन्हें फ़िल्म का ट्रेलर कैसा लगा और आनंद कुमार के रोल में रितिक रोशन कैसे लगे? इस पर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
गजानन ने लिखा, ''ग़ज़ब का ट्रेलर है. रितिक रोशन सर कमाल की एक्टिंग है.''
@Noorala22536925 ट्विटर हैंडल से लिखा गया- ये काफी प्रेरक फ़िल्म लग रही है. मोउनुद्दीन रहमानी लिखते हैं, ''रितिक रोशन बहुत ही बढ़िया लगे हैं.''
सुमित कृष्णा ने लिखा, ''पंकज त्रिपाठी उर्फ़ कालीन भैया ज्यादा मुफ़ीद रहते आनंद सर की भूमिका के लिए.''
प्रदीप लिखते हैं, ''इस फ़िल्म में राज कुमार राव या पंकज त्रिपाठी जैसे एक्टर्स की ज़रूरत थी, जिन्होंने थियेटर किया है. रितिक ग्लैमरस हैं.'
जयंत कुमार ने लिखा, ''कहानी डायलॉग सब कुछ ठीक है पर रितिक रोशन की ओवर एक्टिंग कुछ ज़्यादा ही दिख रही है.''
राजेश कुमार लिखते हैं, ''रितिक रोशन की एक्टिंग से बिहारी लहज़ा नदारद दिखा. मनोज वाजपेयी या पंकज त्रिपाठी इस रोल के लिए काफी अच्छे रहते.''
सौरभ सिंह ने लिखा, ''रितिक बिहारी लहज़े को पकड़ने में बिलकुल नाकाम रहे हैं. रितिक के हाव-भाव 'कोई मिल गया' के रोहित जैसे लग रहे हैं.''
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